लेखकों के लिए पत्रिका
अध्याय 1: शिल्प और अभ्यास
पहले वाक्य से तैयार पांडुलिपि तक: औज़ार, आदतें और वह रूप जिसमें पाठ प्रकाशक की मेज़ तक पहुँचता है।
6 लेख
- लेखकों के लिए राइटिंग सॉफ़्टवेयर: अपनी किताब के लिए सही टूल कैसे चुनेंउपन्यास एक ऐसा दस्तावेज़ है जिसके साथ आप महीनों या बरसों रहते हैं। किताब जितने बड़े प्रोजेक्ट के लिए सॉफ़्टवेयर को क्या करना चाहिए, जाने-पहचाने टूल आपस में कैसे तुलना करते हैं, और हिन्दी में लिखते समय यूनिकोड क्यों ज़रूरी है — यह सब इस लेख में।7 मिनट का पाठ
- अपनी पहली किताब कैसे लिखें: विचार से पूरे पहले ड्राफ़्ट तकज़्यादातर पहले उपन्यास प्रतिभा की कमी से नहीं रुकते, वे आधे रास्ते में ठहर जाते हैं। ये वे सिद्धांत हैं जो आपको पहली चिंगारी से पूरे पहले ड्राफ़्ट तक ले जाते हैं, और यह भी कि चमकाने से ज़्यादा ज़रूरी पूरा करना क्यों है।7 मिनट का पाठ
- पांडुलिपि का फ़ॉर्मेट: अपने उपन्यास को कैसे सजाएँ और उसकी लंबाई कैसे मापेंप्रकाशक और संपादक पांडुलिपि को एक साफ़, जाने-पहचाने रूप में देखना चाहते हैं। हिन्दी पांडुलिपि के लिए यूनिकोड, फ़ॉन्ट, पंक्ति-अंतराल और शब्द-गणना कैसी हो, अंग्रेज़ी का मानक फ़ॉर्मेट क्या है, और कौन-सी ग़लतियाँ पांडुलिपि को नौसिखिया दिखाती हैं।5 मिनट का पाठ

- पांडुलिपि क्या है? अर्थ, चरण और प्रकाशक को भेजी जाने वाली प्रतिपहले ड्राफ़्ट से प्रूफ़ तक आपकी किताब पांडुलिपि कहलाती है, पर वह हमेशा एक ही चीज़ नहीं होती। शब्द का अर्थ क्या है, पांडुलिपि किन चरणों से गुज़रती है, और प्रकाशक को भेजी जाने वाली प्रति कैसी दिखनी चाहिए।6 मिनट का पाठ
- बच्चों की किताब कैसे लिखें: आयु-वर्ग, शब्द-संख्या और चित्रांकनबच्चों की किताबें छोटी होती हैं, पर आसान नहीं। कौन-से रूप किस उम्र के लिए हैं, प्रकाशक कितने शब्दों की अपेक्षा रखते हैं, पाठ और चित्र साथ कैसे काम करते हैं, और भेजने से पहले क्या जानना चाहिए।6 मिनट का पाठ
- फ़ैनफ़िक्शन कैसे लिखें: शिल्प, समुदाय और मौलिक लेखन की ओर क़दमबहुत-से लेखकों की शुरुआत फ़ैनफ़िक्शन से होती है, और यह सचमुच अच्छा अभ्यास-क्षेत्र है। शिल्प क्या माँगता है, फ़ैन समुदाय कैसे काम करते हैं, कॉपीराइट के बारे में क्या जानें, और एक फ़ैन कहानी मौलिक उपन्यास कैसे बन सकती है।6 मिनट का पाठ
अध्याय 2: नाट्य-संरचना और पात्र
कहानी को क्या थामे रखता है: तनाव, मोड़ और ऐसे पात्र जिनकी इच्छाएँ कथानक को आगे बढ़ाती हैं।
3 लेख
- उपन्यास का प्लॉट कैसे बनाएँ: आज़माए हुए तरीक़ों की तुलनातीन अंकों की संरचना, नायक की यात्रा, स्नोफ़्लेक पद्धति, Save the Cat या दृश्य कार्ड: हर तरीक़ा क्या करता है, किसके लिए ठीक है, और एक उपन्यास को सचमुच कितनी योजना चाहिए।7 मिनट का पाठ
- पात्र प्रोफ़ाइल: गहराई वाले पात्र कैसे गढ़ेंकाम की पात्र प्रोफ़ाइल आँखों के रंग और पसंदीदा खाने की सूची नहीं है। वह एक औज़ार है जो कहानी पैदा करता है। उसमें क्या होना चाहिए, इच्छा, घाव और ज़रूरत आपस में कैसे जुड़ते हैं, और लिखते समय प्रोफ़ाइल का उपयोग कैसे करें।6 मिनट का पाठ
- प्लॉट क्या है? कहानी का नक़्शाप्लॉट केवल यह नहीं कि क्या होता है। वह घटनाओं को कारण और परिणाम से जोड़ता है, संघर्ष से उन्हें गति देता है और उन्हें चढ़ते हुए चाप का आकार देता है। प्लॉट किन चीज़ों से बनता है, और कैसे परखें कि आपका प्लॉट टिकता है।6 मिनट का पाठ
अध्याय 3: साहित्यिक संसार
थ्रिलर से बाल-पुस्तक तक हर विधा के नियम — और कब उन्हें जान-बूझकर तोड़ना सार्थक है।
3 लेख



- मिस्ट्री और थ्रिलर में अंतर: जासूसी कथा और रोमांचक कथा कैसे अलग हैं?दोनों अक्सर एक ही शेल्फ़ पर रहते हैं, लेकिन मिस्ट्री और थ्रिलर तनाव अलग ढंग से पैदा करते हैं: एक पहेली से, दूसरा ख़तरे से। संरचना, दृष्टिकोण और गति में दोनों विधाएँ कैसे अलग हैं, और कौन-सी उपविधाएँ किसकी हैं।6 मिनट का पाठ
- किताबों की विधाएँ: लेखकों के लिए एक मार्गदर्शिकारोमांस से विज्ञान कथा तक, जासूसी से पौराणिक कथा-साहित्य तक: कथा-साहित्य की मुख्य विधाएँ और उपविधाएँ, विधा और आयु-वर्ग का अंतर, और प्रकाशकों, दुकानों और ऑनलाइन स्टोर के लिए सही वर्गीकरण इतना अहम क्यों है।6 मिनट का पाठ
- डार्क रोमांस कैसे लिखें: परिपाटियाँ, पाठकों की अपेक्षाएँ और ज़िम्मेदार शिल्पडार्क रोमांस प्रेम-कहानी को अँधेरे विषयों, नैतिक रूप से धूसर पात्रों और जान-बूझकर बेचैन करने वाले पलों से जोड़ता है। यह उपविधा क्या है, पाठक क्या चाहते हैं, और सामग्री-चेतावनियाँ, प्रस्तुति और प्लेटफ़ॉर्म के नियम सावधानी से कैसे संभालें।6 मिनट का पाठ
अध्याय 4: पुस्तक-सौंदर्य और टाइपसेटिंग
पाठ-क्षेत्र, टाइपफ़ेस और आवरण: वह सब जो पहली पंक्ति पढ़ने से पहले ही किताब को हाथ में मूल्यवान बनाता है।
2 लेख
- बुक कवर कैसे डिज़ाइन करें: विधा, देवनागरी टाइपोग्राफ़ी और प्रिंट फ़ाइलेंआपका आवरण तय करता है कि कोई आपकी किताब पर क्लिक करेगा भी या नहीं। विधा के सही संकेत कैसे दें, थंबनेल पर शीर्षक पढ़ने लायक़ कैसे रखें, ई-बुक और प्रिंट कवर सही कैसे बनाएँ, और छवि-अधिकारों में कैसे सुरक्षित रहें।7 मिनट का पाठ
- पेपरबैक: ट्रिम साइज़, जिल्द और छपाई, अपनी किताब की योजना कैसे बनाएँपेपरबैक छपने से पहले ट्रिम साइज़, काग़ज़, हाशिये और आवरण को आपस में मेल खाना होता है। आम ट्रिम साइज़, पृष्ठ-संख्या स्पाइन की चौड़ाई कैसे तय करती है, और छपाई की लागत किन बातों पर निर्भर है।7 मिनट का पाठ
अध्याय 5: पाठक तक की राह
सारांश, प्रकाशक या स्व-प्रकाशन: पांडुलिपि से पुस्तक तक के रास्ते और हर रास्ते की माँगें।
3 लेख

- किताब कैसे प्रकाशित करें: पांडुलिपि से बाज़ार तक के रास्तेपारंपरिक प्रकाशक, छोटा प्रकाशन गृह, सेल्फ़-पब्लिशिंग या सशुल्क सेवा: हर रास्ते की अपनी ख़ूबियाँ, लागत और समय-सीमा है। हिन्दी लेखकों के लिए एक साफ़ नज़र वाला परिचय, ताकि आप अपनी पांडुलिपि के लिए सही रास्ता चुन सकें।8 मिनट का पाठ
- Amazon KDP पर किताब कैसे पब्लिश करें: ई-बुक और पेपरबैक, क़दम-दर-क़दमKindle Direct Publishing कई सेल्फ़-पब्लिशिंग लेखकों का पहला पड़ाव है। खाता और कर जानकारी, मेटाडेटा और श्रेणियाँ, मूल्य और रॉयल्टी, प्रिंट फ़ाइलें, और हिन्दी किताबों के लिए एक ज़रूरी सीमा: सब कुछ एक जगह।8 मिनट का पाठ
- सिनॉप्सिस कैसे लिखें (और प्रकाशक को भेजी जाने वाली बाक़ी सामग्री)प्रकाशक एक परिचय-पत्र, एक सारांश और कुछ नमूना पृष्ठों से तय करते हैं कि आपकी पांडुलिपि पढ़ी जाए या नहीं। हर हिस्से में क्या जाता है, सिनॉप्सिस कितना लंबा हो, हिन्दी प्रकाशक क्या माँगते हैं, और कौन-सी ग़लतियाँ जल्दी “ना” दिलाती हैं।7 मिनट का पाठ
किताब कैसे प्रकाशित करें: पांडुलिपि से बाज़ार तक के रास्ते
पारंपरिक प्रकाशक, छोटा प्रकाशन गृह, सेल्फ़-पब्लिशिंग या सशुल्क सेवा: हर रास्ते की अपनी ख़ूबियाँ, लागत और समय-सीमा है। हिन्दी लेखकों के लिए एक साफ़ नज़र वाला परिचय, ताकि आप अपनी पांडुलिपि के लिए सही रास्ता चुन सकें।
8 मिनट का पाठ · 23 सितंबर 2026 को अपडेट किया गया
तैयार पांडुलिपि अभी किताब नहीं है। आपकी आख़िरी पंक्ति और दुकान की शेल्फ़ के बीच संपादन, प्रूफ़रीडिंग, टाइपसेटिंग, आवरण डिज़ाइन, छपाई, वितरण और प्रचार आते हैं। असली सवाल यह है कि यह काम कौन करता है, इसका ख़र्च कौन उठाता है और आय में किसे कितना हिस्सा मिलता है।
चार मुख्य रास्ते हैं: पारंपरिक प्रकाशक, छोटा या स्वतंत्र प्रकाशन गृह, सेल्फ़-पब्लिशिंग, और सशुल्क सेवाएँ जो शुल्क लेकर काम के कुछ हिस्से संभालती हैं। सिद्धांत रूप में कोई भी बेहतर नहीं। सब इस पर निर्भर है कि आप अपनी किताब से क्या हासिल करना चाहते हैं।
पारंपरिक प्रकाशन
पारंपरिक प्रकाशक आपकी किताब छापने का अधिकार लेता है। बदले में वह आपको हर बिकी प्रति पर रॉयल्टी देता है, और कुछ अनुबंधों में रॉयल्टी के विरुद्ध एक अग्रिम राशि (advance) भी। संपादन, आवरण, निर्माण, वितरण और प्रचार प्रकाशक की ज़िम्मेदारी है।
अमेरिका और ब्रिटेन में बड़े प्रकाशक लगभग केवल साहित्यिक एजेंटों के ज़रिए पांडुलिपियाँ लेते हैं। हिन्दी में तस्वीर अलग है: ज़्यादातर प्रकाशक लेखकों से सीधे पांडुलिपि या प्रस्ताव लेते हैं, और भारत में साहित्यिक एजेंसियाँ हैं तो सही, पर गिनी-चुनी। तीन उदाहरण, जैसा वे अपनी वेबसाइटों पर बताते हैं (2026 तक):
- राजकमल प्रकाशन पहले पूरी पांडुलिपि नहीं, एक प्रस्ताव माँगता है: किताब का 500 से 1,200 शब्दों का परिचय और लेखक की जानकारी। प्रस्ताव पसंद आने पर पूरी पांडुलिपि माँगी जाती है। फ़ाइल MS Word में, यूनिकोड या Mangal फ़ॉन्ट में। छह महीने तक उत्तर न मिले तो आप पांडुलिपि कहीं और भेजने के लिए स्वतंत्र हैं।
- हिंद युग्म Word या PDF में ईमेल से पांडुलिपि लेता है। उपन्यास के लिए शुरुआती 30 प्रतिशत या 50 पृष्ठ और लगभग 200 शब्दों का सारांश, साथ में लेखक-परिचय। डाक से भेजी या हाथ से लिखी स्कैन की गई पांडुलिपियाँ स्वीकार नहीं होतीं।
- हिंद पॉकेट बुक्स, जो अब पेंगुइन रैंडम हाउस परिवार का हिस्सा है, पूरी पांडुलिपि या पाँच-छह अध्याय, संक्षिप्त परिचय और सिनॉप्सिस माँगता है।
नियम बदलते रहते हैं, इसलिए भेजने से पहले हर प्रकाशक की वेबसाइट पर मौजूदा दिशानिर्देश पढ़ें। रॉयल्टी की दरें अनुबंध पर निर्भर करती हैं; भारत में वे अक्सर किताब के मुद्रित मूल्य (MRP) के प्रतिशत के रूप में तय होती हैं। तुलना के लिए, अंग्रेज़ी-भाषी बाज़ार की सामान्य दरें:
| फ़ॉर्मेट | सामान्य रॉयल्टी, अमेरिका/ब्रिटेन (केवल अनुमान) |
|---|---|
| हार्डकवर | मूल्य का लगभग 10–15% |
| ट्रेड पेपरबैक | मूल्य का लगभग 7.5% |
| ई-बुक | प्रकाशक की शुद्ध प्राप्ति का लगभग 25% |
हस्ताक्षर करने से पहले हर प्रकाशन अनुबंध किसी जानकार से जँचवाएँ, जैसे प्रकाशन मामलों के वकील से या किसी लेखक संगठन के ज़रिए। ध्यान दें कि अधिकार किस अवधि और किन भाषाओं या फ़ॉर्मेटों (ई-बुक, ऑडियो, अनुवाद) के लिए दिए जा रहे हैं।
छोटे और स्वतंत्र प्रकाशन गृह
छोटे और स्वतंत्र प्रकाशन गृह भी लेखकों से सीधे पांडुलिपियाँ लेते हैं। वे अक्सर किसी ख़ास क्षेत्र पर केंद्रित होते हैं, जैसे कविता, साहित्यिक कथा, अपराध-कथा या किसी अंचल का लेखन, और अपने लेखकों के साथ ज़्यादा क़रीब से काम करते हैं। अग्रिम राशि कम होती है या होती ही नहीं, और दुकानों तक पहुँच सीमित रहती है, लेकिन संपादन और निर्माण फिर भी प्रकाशक का काम और ख़र्च है।
सेल्फ़-पब्लिशिंग
सेल्फ़-पब्लिशिंग में प्रकाशक आप ख़ुद हैं। शीर्षक, आवरण, मूल्य और समय आप तय करते हैं, और हर बिक्री में आपका हिस्सा कहीं बड़ा होता है। Amazon KDP पर, उदाहरण के लिए, ई-बुक की रॉयल्टी मूल्य के अनुसार 35% या 70% है (2026 तक; मौजूदा शर्तें ज़रूर देखें)। हिन्दी की किताबें KDP पर फ़िलहाल केवल ई-बुक के रूप में प्रकाशित हो सकती हैं, पेपरबैक के रूप में नहीं। छपी हुई प्रति के लिए भारत में प्रिंट-ऑन-डिमांड सेवाएँ और स्थानीय प्रिंटर हैं। अमेज़न का रास्ता विस्तार से Amazon KDP पर किताब कैसे पब्लिश करें में है।
बदले में सारी लागत और हर फ़ैसला आपके ज़िम्मे है। संपादन, प्रूफ़रीडिंग, आवरण डिज़ाइन और विज्ञापन का भुगतान पहले करना होता है। भारत में ISBN मुफ़्त मिलता है: शिक्षा मंत्रालय के अधीन राजा राममोहन राय राष्ट्रीय ISBN एजेंसी isbn.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन लेती है, और ख़ुद प्रकाशित करने वाले लेखक भी आवेदन कर सकते हैं। हर फ़ॉर्मेट (पेपरबैक, हार्डकवर, ई-बुक) के लिए अलग ISBN चाहिए।
सशुल्क सेवाएँ और वितरक
प्रकाशक और सब कुछ ख़ुद करने के बीच सेवाएँ आती हैं। वितरक आपकी ई-बुक या पेपरबैक को एक साथ कई स्टोर तक पहुँचाते हैं और आय में हिस्सा या शुल्क लेते हैं। दूसरी कंपनियाँ संपादन, डिज़ाइन और वितरण के पैकेज तय क़ीमत पर बेचती हैं; कुछ ख़ुद को हाइब्रिड या सेल्फ़-पब्लिशिंग प्रकाशक कहती हैं। दोनों का अर्थ हो सकता है, अगर आप जानते हैं कि क्या ख़रीद रहे हैं: प्रकाशक आप ही रहते हैं, अधिकार आपके पास रहते हैं, और कोई भी पैकेज आपकी किताब की माँग पैदा नहीं करता।
- मैं कौन-से अधिकार दे रहा हूँ, और कितने समय के लिए?
- क्या मैं कभी भी अनुबंध छोड़कर किताब कहीं और प्रकाशित कर सकता हूँ?
- प्रकाशक के रूप में किसका नाम जाएगा, और ISBN किसके नाम पर है?
- कौन-सी लागत एकमुश्त है, और कौन-सी हर बिकी प्रति पर?
- इनमें से कौन-सी सेवाएँ मैं अलग से कम में ख़रीद सकता हूँ?
रास्तों की तुलना
| पारंपरिक | छोटा प्रकाशन गृह | सेल्फ़-पब्लिशिंग | |
|---|---|---|---|
| पहुँच | हिन्दी में प्रायः सीधे, बहुत चयनात्मक | सीधे, क्षेत्र मायने रखता है | सबके लिए खुला |
| आपकी लागत | कोई नहीं | कोई नहीं | संपादन, आवरण, प्रचार |
| आय में हिस्सा | कम | कम, अक्सर बिना अग्रिम | ऊँचा |
| नियंत्रण | प्रकाशक के पास | साझा | आपके पास |
| किताबों की दुकानें | व्यापक उपस्थिति | सीमित | पहुँचना कठिन |
| प्रकाशन तक का समय | स्वीकृति के बाद प्रायः कई महीने से एक साल या अधिक | प्रायः इसी तरह | पांडुलिपि तैयार होने के बाद कुछ हफ़्ते |
ये समय-सीमाएँ सामान्य हैं, वादा नहीं। हिंद युग्म, उदाहरण के लिए, स्वीकृति से प्रकाशन तक कम से कम छह महीने बताता है। पारंपरिक रास्ते पर खोज का समय भी जोड़िए: प्रस्ताव भेजना और उत्तर का इंतज़ार करना कई महीने ले सकता है, और परिणाम की कोई गारंटी नहीं।
पाँच क़दमों में प्रक्रिया
- पांडुलिपि पूरी करें और संशोधित करें। कम से कम एक पूरा संशोधन, हो सके तो बीटा पाठकों की प्रतिक्रिया के साथ।
- अपना रास्ता चुनें। क्या आपकी किताब किसी प्रकाशक की सूची में फ़िट बैठती है, या आप गति और नियंत्रण चाहते हैं?
- सामग्री तैयार करें। प्रकाशक के लिए: प्रस्ताव या परिचय-पत्र, सारांश (सिनॉप्सिस) और नमूना अध्याय। सेल्फ़-पब्लिशिंग के लिए: संपादन, प्रूफ़रीडिंग, आवरण और भीतरी लेआउट।
- भेजें या बनाएँ। सोच-समझकर चुने प्रकाशकों को भेजें और हिसाब रखें; या अपनी फ़ाइलें बनाकर अपलोड करें।
- लॉन्च की तैयारी करें। ब्लर्ब, लेखक-परिचय, नमूना अध्याय, प्रचार योजना। अब प्रकाशक भी लेखकों से प्रचार में हाथ बँटाने की अपेक्षा रखते हैं।
सबमिशन की सामग्री के लिए सिनॉप्सिस कैसे लिखें पढ़ें।
आपके लिए कौन-सा रास्ता सही है?
चुनाव पांडुलिपि से ज़्यादा आपके लक्ष्यों और संसाधनों पर निर्भर करता है। कुछ प्रश्नों के ईमानदार उत्तर किसी भी आम सलाह से ज़्यादा मदद करते हैं:
- किताबों की दुकानें और पुस्तक मेले आपके लिए कितने अहम हैं? अगर आप चाहते हैं कि आपकी किताब दुकानों में और विश्व पुस्तक मेले जैसे आयोजनों में प्रकाशक के स्टॉल पर दिखे, तो पारंपरिक प्रकाशक सबसे भरोसेमंद रास्ता है।
- आप कितना समय और पैसा लगा सकते हैं? सेल्फ़-पब्लिशिंग में दोनों चाहिए, और लिखने के साथ-साथ काफ़ी मेहनत भी।
- आप कितनी जल्दी प्रकाशित करना चाहते हैं? समसामयिक विषयों या जल्दी-जल्दी आने वाली सीरीज़ के लिए पारंपरिक समय-सीमा अक्सर बहुत धीमी है।
- आप कितना ख़ुद तय करना चाहते हैं? प्रकाशक के यहाँ शीर्षक और आवरण पर संपादकीय और बिक्री टीमों की भी राय होती है। सेल्फ़-पब्लिशिंग में फ़ैसला आपका अकेले का है, सारे नतीजों के साथ।
- क्या आप ऐसी विधा में लिखते हैं जिसके पाठक ऑनलाइन पढ़ते हैं? रोमांस, हॉरर, रहस्य और थ्रिलर डिजिटल मंचों पर अक्सर ख़ास तौर पर अच्छा करते हैं।
आज बहुत-से लेखक दोनों रास्ते अपनाते हैं, जिसे हाइब्रिड लेखक होना कहा जाता है: एक किताब प्रकाशक के साथ, दूसरी ख़ुद प्रकाशित। यह तब तक ठीक है जब तक आपके अनुबंध इसकी अनुमति दें। प्रकाशन अनुबंधों में ऐसी शर्तों पर ध्यान दें जो आपकी अगली किताब को भी बाँध लेती हैं।
फ़ैसला करने से पहले
- पांडुलिपि पूरी और संशोधित
- विधा और पाठक वर्ग स्पष्ट
- हाल की तुलनीय किताबों पर शोध
- सेल्फ़-पब्लिशिंग हो तो संपादन, आवरण और प्रचार का बजट तय
- पारंपरिक रास्ता हो तो उपयुक्त प्रकाशकों और उनके दिशानिर्देशों की सूची
- हस्ताक्षर से पहले अनुबंध और प्रस्ताव जँचवाए गए
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या मुझे साहित्यिक एजेंट की ज़रूरत है?
हिन्दी प्रकाशन में आमतौर पर नहीं: ज़्यादातर हिन्दी प्रकाशक लेखकों से सीधे पांडुलिपि या प्रस्ताव लेते हैं। अंग्रेज़ी में, ख़ासकर अमेरिका और ब्रिटेन के बड़े प्रकाशकों के लिए, एजेंट लगभग हमेशा ज़रूरी है। हर प्रकाशक की वेबसाइट पर देखें कि वह पांडुलिपि लेता है या नहीं, और कैसे।
क्या सेल्फ़-पब्लिशिंग के बाद पारंपरिक प्रकाशक के पास जा सकते हैं?
ऐसा होता है, ज़्यादातर उन किताबों के साथ जो अपने दम पर अच्छी बिकी हैं। क्योंकि अधिकार आपके पास रहते हैं, आप उन्हें बाद में किसी प्रकाशक को दे सकते हैं। लेकिन कम बिकी सेल्फ़-पब्लिश्ड किताब में प्रकाशकों की रुचि कम ही होती है।
सेल्फ़-पब्लिशिंग में कितना ख़र्च आता है?
बड़े प्लेटफ़ॉर्मों पर अपलोड करना मुफ़्त है, और भारत में ISBN भी मुफ़्त है। ख़र्च पेशेवर संपादन, प्रूफ़रीडिंग, आवरण डिज़ाइन, छपाई और विज्ञापन से आता है। आप कितना ख़र्च करेंगे, यह लंबाई, विधा और आपके अपने कौशल पर निर्भर है।
अध्याय 6: पहचान और पहुँच
पाठक आपकी किताब तक कैसे पहुँचते हैं: लेखक वेबसाइट, शृंखलाएँ, समीक्षाएँ और किताब की असली कमाई।
3 लेख


- लेखकों के लिए बुक मार्केटिंग: जो सचमुच काम करता हैमार्केटिंग लॉन्च के बाद नहीं, आपके आवरण और ब्लर्ब से शुरू होती है। पाठक वर्ग, न्यूज़लेटर, सोशल मीडिया, समीक्षाएँ, विज्ञापन, पुस्तक मेले, साहित्य उत्सव और सीरीज़ पर एक साफ़ नज़र वाली मार्गदर्शिका।7 मिनट का पाठ
- लेखक वेबसाइट कैसे बनाएँ: डोमेन, पृष्ठ और उन पर क्या रखेंआपकी वेबसाइट ऑनलाइन की अकेली जगह है जो पूरी तरह आपकी है। उसमें कौन-से पृष्ठ चाहिए, पाठक और मीडिया वहाँ क्या खोजते हैं, और लॉन्च से पहले गोपनीयता की कौन-सी बुनियादी बातें पूरी करनी हैं।7 मिनट का पाठ
- लेखक एक किताब से कितनी कमाई करते हैं? रॉयल्टी, अग्रिम और असली आँकड़ेरॉयल्टी, अग्रिम राशि, अग्रिम की भरपाई: किताब के मूल्य में से आप तक कितना पहुँचता है, यह प्रकाशन के तरीक़े पर निर्भर है। पारंपरिक और सेल्फ़-पब्लिशिंग के हिसाब के उदाहरण, रुपये और डॉलर में, सहायक अधिकार और वे ख़र्च जिन्हें लेखक भूल जाते हैं।7 मिनट का पाठ
